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Neem Karoli Baba

नीम करोली बाबा का इतिहास

उत्तराखंड के नैनीताल के पास कैंची धाम में बाबा नीम करौली 1961 में पहली बार यहां आए और उन्होंने अपने पुराने मित्र पूर्णानंद जी के साथ मिलकर यहां आश्रम बनाने का विचार किया था। बाबा नीम करौली ने इस आश्रम की स्थापना 1964 में की थी आश्रम पहाड़ी इलाके में देवदार के पेड़ों के बीच स्थित है। आश्रम एक बहुत ही साधारण दिखने वाले व्यक्ति के इर्द-गिर्द विकसित हुआ जो एक असाधारण संत बने और नीम करोली बाबा कहलाये, उस गांव के नाम पर जहां उन्हें पहली बार स्वतंत्रता-पूर्व भारत में एक ट्रेन के प्रथम श्रेणी के डिब्बे में बिना टिकट यात्री के रूप में खोजा गया था। अगले पड़ाव पर अंग्रेज टिकट कलेक्टर ने उन्हें बाहर फेंक दिया। इसके बाद वह चुपचाप उतर गए और एक पेड़ के नीचे बैठ गए । हालाँकि, उसके बाद ट्रेन नहीं चली, इंजन चालक ने कारण जानने की कोशिश की लेकिन सभी प्रकार से जाँचने के बाद भी ट्रेन नहीं चली । भारतीय यात्रियों ने तब टिकट कलेक्टर से कहा कि चूंकि उन्होंने एक पवित्र व्यक्ति को ट्रेन से उतार दिया है, इसलिए ट्रेन नहीं चलेगी। इस तरह की तर्कहीनता पर विश्वास करने से शर्मिंदा, टिकट कलेक्टर ने फिर नीम करोली बाबा को ट्रेन में वापस बुलाया। बाबा चुपचाप ट्रेन में वापस आ गया और बैठते ही ट्रेन वापस चल गई | बाद में , इस स्थान पर एक सुव्यवस्थित स्टेशन विकसित हुआ, और 1973 में अपना शरीर छोड़ने तक बाबा और भी कई चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध हुए।

नीम करोली बाबा की शक्ति

रिचर्ड एलपर्ट (रामदास) ने नीम करोली बाबा के चमत्कारों पर ‘मिरेकल ऑफ़ लव’ नामक एक किताब लिखी इसी में ‘बुलेटप्रूफ कंबल’ नाम से एक घटना का जिक्र है। बाबा हमेशा कंबल ही ओड़ा करते थे। आज भी लोग जब उनके मंदिर जाते हैं तो उन्हें कंबल भेंट करते हैं। यह कई बाबा भक्तों द्वारा वर्णित चमत्कारी प्रसंगों से भरा है। एक सफेद धोती में लिपटे हुए अपने कंधों के चारों ओर शोल लिपटे हुए  व्यक्ति  के रूप में  सहज प्रेम के लिए जाने जाते थे जो उनको देखने से स्पष्ट था। शरारतपूर्ण हास्य-व्यंग्य और सामान्य प्रतीत होने वाले तरीकों से बाबा ने आश्रम में लोगों की भीड़ खींची और अपने जीवनकाल में उन्होंने कई स्थानों की यात्रा की । उनके भक्तों में सड़क के किनारे चाय बेचने वाला, फल बेचने वाला, हार्वर्ड के प्रोफेसर, हिंदी साहित्य के विद्वान आदि थे लेकिन बाबा के आश्रम में सबसे ज्यादा अमेरिकी ही आते हैं। । उनका एकमात्र उपदेश सभी से प्रेम करना था, उनके अधिकांश भक्तों को एक अनुवादक की आवश्यकता थी। जो उनके शब्दों की व्याख्या करें।

एसा ही एक रेस्तरां के मालिक का प्रसंग –

“हम उनकी देखरेख में बड़े हुए”, मालिक का वृतांत “नीम करोली बाबा पचास साल पहले सड़क के किनारे इस बेंच पर बैठे थे तब उन्हें कोई नहीं जानता था , जब मेरे पिता, वहा एक रात गए मेरे पिता भी उन्हें नहीं जानते थे। नीम करोली बाबा ने मेरे पिता को नाम पुकार कर बुलाया और उनसे पूछा कि वह रात में कहां जा रहे हैं। एक अजनबी द्वारा इस तरह नाम से बुलाने पर आश्चर्यचकित होकर, मेरे पिता रुक गए और इससे भी अधिक चकित हुए जब बाबा ने उन्हें अदालत में लंबित मामले की चिंता न करने के लिए कहा, क्योंकि फैसला उनके पक्ष में होगा। बाबा ने तब मेरे पिता से कभी-कभी मिलने का वादा किया था, जो उन्होंने दस साल बाद किया जब वे कुछ दिनों के लिए हमारे घर में रहे। आज हमारे पास जो कुछ भी है वह उनकी कृपा के कारण है।”

नीम करोली बाबा के 5 रोचक तथ्य

1. नीम करोली बाबा का वास्तविक नाम लक्ष्मीनारायण शर्मा था। उत्तरप्रदेश के अकबरपुर गांव में उनका जन्म 1900 के आसपास हुआ था। 17 वर्ष की उम्र में ही उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हो गई थी। उनके पिता का नाम दुर्गा प्रसाद शर्मा था। 11 वर्ष की उम्र में ही बाबा का विवाह हो गया था।
 
 
2. 1958 में बाबा ने अपने घर को त्याग दिया और पूरे उत्तर भारत में साधुओं की भांति विचरण करने लगे थे। उस दौरान लक्ष्मण दास, हांडी वाले बाबा और तिकोनिया वाले बाबा सहित वे कई नामों से जाने जाते थे। गुजरात के ववानिया मोरबी में तपस्या की तो वहां उन्हें तलईया बाबा के नाम से पुकारते थे।
 
 
3. उन्होंने अपने शरीर का त्याग 11 सितंबर 1973 को वृंदावन में किया था। नीम करोली बाबा का समाधि स्थल नैनीताल के पास पंतनगर में है। यह एक ऐसी जगह है जहां कोई भी मुराद लेकर जाए तो वह खाली हाथ नहीं लौटता। यहां बाबा नीम करौली की भी एक भव्य मूर्ति स्थापित की गयी है। यहां हनुमानजी की मूर्ति भी है।
 
 
4. नीम करोली बाबा के भक्तों में एप्पल के मालिक स्टीव जॉब्स, फेसबुक के मालिक मार्क जुकरबर्क और हॉलीवुड एक्ट्रेस जूलिया रॉबर्ट्स का नाम लिया जाता है। कहा जाता है कि इस धाम की यात्रा करके उनका जीवन बदल गया।
 
 
5. 15 जून को देवभूमि कैंची धाम में मेले का आयोजन होता है और यहां पर देश-विदेश से बाबा नीम करौली के भक्त आते हैं। इस धाम में बाबा नीम करौली को भगवान हनुमान का अवतार माना जाता है। देश-विदेश से हजारों भक्त यहां हनुमान जी का आशीर्वाद लेने आते हैं। बाबा के भक्तों ने इस स्थान पर हनुमान का भव्य मन्दिर बनवाया। यहां 5 देवी-देवताओं के मंदिर हैं। इनमें हनुमानजी का भी एक मंदिर है।
 

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